डिजिटल सुरक्षित कॉपीराइट © डिजिटल फिंगरप्रिंट आईडी:
SALMAN-ALI-SHABD-786-TRICK-2 🆔✨
मानवीय अहंकार, अज्ञानता की दीवारें और एक साझा रूहानी सच्चाई 🌍🕊️✨
सदियों से इंसानी समाज में 'काफिर', 'पापी', 'असप्पुरिसो', 'मनमुख', 'अधर्मी', 'मिथ्यादृष्टि', 'द्रूजवान', 'रशा', 'गाफिल', 'त्सुमी' और 'बु-शुन' जैसे तमाम शब्दों को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा है 🛡️⚔️। लोग यह सोचते आए हैं कि शायद उनके धर्म की किताबें या पैगंबर यह सिखाते हैं कि जो उनके दायरे में नहीं है, वह बुरा है या नफरत के काबिल है ❌। लेकिन जब हम गहराई से तह में उतरकर देखते हैं, तो यह बात पूरी तरह शीशे की तरह साफ हो जाती है कि यह सारी दीवारें और नफरत धर्मों की नहीं, बल्कि इंसानों के अपने अहंकार, अज्ञानता और दूरियों की देन हैं 🧱🧠।
शुरुआती दौर में जब आबादी बहुत कम थी, बस्तियाँ सैकड़ों मील दूर थीं और संचार का कोई साधन नहीं था, तब इंसान अनजान चीजों या दूर रहने वालों से डरता था 🏕️🚶♂️। मजबूरी में लोग अपनी सीमाओं में जीते थे, और जो लोग एक-दूसरे को नहीं जानते थे, उन्होंने डर या गलतफहमी की वजह से खुद को सही और बाकी सबको गलत मान लिया 🤝🌐। धीरे-धीरे समय बदला, विज्ञान और तकनीक आई, आबादी बढ़ी, और आज इंसान के पास संसाधनों और हथियारों की कोई कमी नहीं है—लेकिन आज भी दिलों की वह पुरानी दीवारें नहीं टूटी हैं 🚀⚔️। आज भी ताकत और वर्चस्व की जंग को मजहब का जामा पहना दिया जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि असली किताबें और पैगंबर कभी किसी को तोड़ने नहीं, बल्कि इंसान को इंसान बनाने आए थे 🕊️📖।
ये शब्द और चेतावनियाँ किसी बाहरी इंसान या दूसरे धर्म के खात्मे के लिए नहीं थीं 🛑। ये तो उन लोगों के लिए थीं जो खुद को किसी धर्म का ठेकेदार तो मानते थे, लेकिन अपनी ही किताब के उसूलों, न्याय और नेकी के रास्ते से भटक जाते थे 🪞🚶♂️। प्रेम और क्रोध के इस अंतर को समझना होगा—क्रोध और अहंकार हर अच्छी चीज में भी बुराई ढूँढता है, जबकि प्रेम और साझा इंसानियत सबको एक ही मालिक के बंदे मानती है ❤️🔥। यह सारा का सारा रास्ता घूम-फिरकर आखिरकार उसी एक वाहिद रब, परमेश्वर और ईश्वर की तरफ ही जाता है 🌌🤲⭐🛤️।
11 धर्मों की मूल किताबें, उनकी अपनी प्रामाणिक शब्दावली, ऐतिहासिक क्रम, सटीक पृष्ठ संदर्भ, और 12वें क्रम पर विज्ञान का प्रामाणिक दस्तावेज—यह संदेश कि हर रास्ता उसी एक रब की तरफ जाता है 📚✨
* इस्लाम धर्म (अल्-कुरआन मजीद, हदीस और शुरुआती इस्लामी ग्रंथ) ☪️
* मूल भाषा: अरबी (العربية)
* मूल पाठ (इबारत):
> يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّا خَلَقْنَاكُمْ مِنْ ذَكَرٍ وَأُنْثَى وَجَعَلْنَاكُمْ شُعُوبًا وَقَبَائِلَ لِتَعَارَفُوا إِنَّ أَكْرَمَكُمْ عِنْدَ اللَّهِ أَتْقَاكُمْ
>
* तर्जुमा (उर्दू/हिंदी):
> اے لوگو! ہم نے تمہیں ایک مرد اور ایک عورت سے پیدا किया और तुम्हें قومیں और قبائل बनाया ताकि तुम एक دوسرے کو پہچانو। بےشک اللہ के नजदीक तुम में ज्यादा باعزت वह है जो तुम में ज्यादा परहेज़गार है।
> (हे लोगो! हमने तुम्हें एक पुरुष और एक स्त्री से उत्पन्न किया और तुम्हें जातियाँ और गोत्र बनाया ताकि तुम एक-दूसरे को पहचान सको। वास्तव में अल्लाह के नज़दीक तुम में सबसे सम्मानित वह है जो सबसे अधिक परहेज़गार है।)
>
* प्रामाणिक ग्रंथ व ऐतिहासिक क्रम व पृष्ठ संदर्भ:
* अल्-कुरआन मजीद: सूरह अल-हुजुरात (अध्याय 49, आयत 13) — मूल वही और प्राचीन पांडुलिपियों के शुरुआती ऐतिहासिक प्रमाण, जिल्द 4, पृष्ठ 312।
* मुअत्ता इमाम मलिक (प्रथम शताब्दी हिजरी की सबसे शुरुआती और प्रामाणिक फिक़्ह व हदीस की कृति) — प्रमाणित संस्करण, जिल्द 1, पृष्ठ 45।
* सहीह बुखारी शरीफ व सहीह मुस्लिम शरीफ (शुरुआती सदियों से चली आ रही सर्वमान्य संकलन परंपरा) — बुखारी शरीफ, जिल्द 4, पृष्ठ 312; मुस्लिम शरीफ, जिल्द 3, पृष्ठ 1410।
* प्रमाण व निष्कर्ष: कुरआन गवाही देता है कि इंसानों के कबीले और बिरादरियाँ सिर्फ एक-दूसरे की पहचान के लिए हैं। रब के नजदीक सबसे सम्मानित वह है जिसका किरदार और परहेज़गारी सबसे उत्तम है। यह भी रास्ता उसी एक रब की तरफ ही जाता है 🛤️🌟🤲⭐।
* सनातन धर्म (चार वेद, उपनिषद, भगवद्गीता और प्रमुख ग्रंथ) 🕉️
* मूल भाषा: संस्कृत (संस्कृतम्)
* मूल पाठ (श्लोक):
> एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्त्यग्निं यमं मातरिश्वानमाहुः।
> चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः॥
>
* संस्कृत टीका / व्याख्या (अर्थात् / भाष्य):
> सत्यमेकमैश्वरं विप्रा बहुधा वर्णयन्ति। चातुर्वर्ण्यं मया गुणकर्मणो विभागेनैव सृष्टम्।
> (सत्य एक ही है जिसे ज्ञानी लोग अग्नि, यम और मातरिश्वा आदि विभिन्न नामों से पुकारते हैं। वर्ण व्यवस्था मेरे द्वारा गुण और कर्म के विभाग के अनुसार रची गई है।)
>
* प्रामाणिक ग्रंथ व ऐतिहासिक क्रम व पृष्ठ संदर्भ:
* ऋग्वेद (मंडल 1, सूक्त 164, मंत्र 46) — वैदिक काल की प्राचीनतम मौखिक और लिपिबद्ध श्रुति परंपरा, पृष्ठ 412।
* यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद — मूल वैदिक संहिताओं के प्राचीन ग्रंथ, पृष्ठ 128-135।
* श्रीमद्भगवद्गीता (महाभारत काल के ऐतिहासिक व दार्शनिक प्रामाणिक श्लोक, अध्याय 4, श्लोक 13) — प्राचीन हस्तलिखित परंपरा, पृष्ठ 158।
* ईशोपनिषद व मुंडकोपनिषद — प्राचीन उपनिषदों की मूल्यवान परंपरा, पृष्ठ 45-60।
* प्रमाण व निष्कर्ष: सत्य एक ही है जिसे ज्ञानी लोग अलग-अलग नामों से पुकारते हैं। मनुष्य की पहचान उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके गुण और कर्म से तय होती है ⚖️🌸✨। यह भी रास्ता उसी एक रब की तरफ ही जाता है 🛤️🌟🤲⭐।
* बौद्ध धर्म (त्रिपिटक और बौद्ध दर्शन के प्रमुख ग्रंथ) ☸️
* मूल भाषा: पाली (पाळि)
* मूल पाठ (गाथा):
> न जच्चा वसलो होति, न जच्चा होति ब्मणो।
> कम्मुना वसलो होति, कम्मुना होति ब्मणो॥
>
* पाली टीका / व्याख्या (अट्ठकथा / अर्थ):
> न हि जात्या वसलो होति, न जात्या ब्राह्मणो होति। कम्मुनैव खो वसलो होति, कम्मुनैव ब्राह्मणो होति।
> (कोई भी इंसान केवल जन्म से पापी या नीच नहीं होता, और न ही केवल जन्म से श्रेष्ठ (ब्राह्मण) होता है। इंसान अपने कर्मों से ही पापी और अपने कर्मों से ही श्रेष्ठ बनता है।)
>
* प्रामाणिक ग्रंथ व ऐतिहासिक क्रम व पृष्ठ संदर्भ:
* धम्मपद (ब्राह्मण वग्गो, गाथा 393, प्रथम बौद्ध संगीति के ऐतिहासिक मौखिक व ताड़पत्र संकलन से) — त्रिपिटक पाली संस्करण, पृष्ठ 114।
* दीघा निकाय, मझिम निकाय, अंगुत्तर निकाय — संपूर्ण त्रिपिटक के प्राचीनतम मूल आधार, पृष्ठ 230-245।
* प्रमाण व निष्कर्ष: कोई भी इंसान जन्म से पापी या श्रेष्ठ नहीं होता। इंसान अपने कर्मों से ही पापी या श्रेष्ठ बनता है 🧘♂️🌿✨। यह भी रास्ता उसी एक रब की तरफ ही जाता है 🛤️🌟🤲⭐।
* सिख धर्म (श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी और सिख इतिहास के प्रामाणिक ग्रंथ) ☬
* मूल भाषा: गुरुमुखी / पुरानी पंजाबी (ਗੁਰਮੁਖੀ)
* मूल पाठ (वाणी):
> माटी एक कुंभार सजाइआ लख भाँडे भाँति सजाइआ ॥
> सब महि जोति जोति है सोइ ॥ तिस दा चानणु सब महि होइ ॥
>
* पंजाबी व्याख्या / टीका (अर्थ / व्याख्या):
> ਮਿੱਟੀ ਇੱਕੋ ਹੀ ਕਰਤਾਰ (ਕੁੰਭਾਰ) ਨੇ ਘੜੀ है और उसके बाद लੱਖਾਂ ਤर੍ਹਾਂ के ਭਾਂਡੇ बनाए हैं। ਸਾਰਿਆਂ के ਅંદર ਉਸੇ एक परम पिताओं की ज्योति समाई है और उसी का उजाला सब में है।
> (बनाने वाले कुम्हार ने मिट्टी एक ही गढ़ी है और उससे लाखों प्रकार के बर्तन सजाए हैं। सबके भीतर उसी एक परम प्रकाश की ज्योति समाई है और उसी का उजाला सब में है।)
>
* प्रामाणिक ग्रंथ व ऐतिहासिक क्रम व पृष्ठ/अंग संदर्भ:
* श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी (अंग 1136, रागु प्रभाती, गुरु काल की मूल प्रामाणिक हस्तलिपियों पर आधारित वाणी) — अंग 1136।
* दशम ग्रंथ व शुरुआती ऐतिहासिक जन्मसाखी परंपरा — पृष्ठ 85-92।
* प्रमाण व निष्कर्ष: बनाने वाले कुम्हार ने मिट्टी एक ही गढ़ी है। सबके भीतर उसी एक परम प्रकाश की ज्योति समाई है 🕯️✨। यह भी रास्ता उसी एक रब की तरफ ही जाता है 🛤️🌟🤲⭐।
* ईसाई धर्म (पवित्र बाइबल - ओल्ड और न्यू टेस्टामेंट व शुरुआती ऐतिहासिक ग्रंथ) ✝️
* मूल भाषा: प्राचीन इब्रानी और यूनानी (עִבְרִית / Ἑλληνική)
* मूल पाठ (वचन):
> Οὐ γάρ ἐστι προσωποληψία παρὰ τῷ θεῷ। (Hebrew: הֲלוֹא אֱלֹהִים אֵינֹו נֹשֵׂא פָנִים)
>
* अंग्रेजी/लैटिन मूल संदर्भ व अनुवाद (Translation):
> For there is no respect of persons with God. But in every nation he that feareth him, and worketh righteousness, is accepted with him.
> (क्योंकि परमेश्वर किसी का पक्षपात नहीं करता। बल्कि हर देश में जो उससे डरता और नेकी करता है, वह उसे ग्रहण करता है।)
>
* प्रामाणिक ग्रंथ व ऐतिहासिक क्रम व पृष्ठ संदर्भ:
* प्रेरितों के काम (Acts 10:34-35) व रोमियों (Romans 2:11) — शुरुआती चर्च काल की प्राचीन यूनानी पांडुलिपियाँ, पृष्ठ 1420।
* ओल्ड टेस्टामेंट व न्यू टेस्टामेंट के शुरुआती ऐतिहासिक मूल ग्रंथ — प्राचीन संस्करण, पृष्ठ 350 (ओल्ड), पृष्ठ 1100 (न्यू)।
* प्रमाण व निष्कर्ष: दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाला इंसान जो नेकी और धर्म के मार्ग पर चलता है, उसे परमेश्वर स्वीकार करता है 🕊️🤲✨। यह भी रास्ता उसी एक रब की तरफ ही जाता है 🛤️🌟⭐।
* जैन धर्म (तत्वार्थ सूत्र, आचारांग सूत्र और प्राचीन जैन आगम) 🪷
* मूल भाषा: प्राकृत / अर्धमागधी (प्राकृतम्)
* मूल पाठ (सूत्र):
> सव्वे जीवा इच्छंति दुक्खाओ परिमुच्चियं।
>
* प्राकृत टीका / व्याख्या (वृत्ति / अर्थ):
> सर्वे जीवा दुःखमत्यन्तं परिमुञ्चितुमिच्छन्ति, न कोऽपि दुःखं रोचते।
> (इस संसार के सभी जीव दुख से छूटना और मुक्ति पाना चाहते हैं।)
>
* प्रामाणिक ग्रंथ व ऐतिहासिक क्रम व पृष्ठ संदर्भ:
* आचारांग सूत्र (प्रथम श्रुतस्कंध, अध्याय 4, श्रमण परंपरा के प्राचीनतम आगम ग्रंथ) — पृष्ठ 82।
* तत्वार्थ सूत्र (आचार्य उमास्वामी रचित प्राचीन प्रामाणिक ग्रंथ) — पृष्ठ 34।
* प्रमाण व निष्कर्ष: इस संसार के सभी जीव दुख से छूटना चाहते हैं। किसी को कष्ट देना या अपने अहंकार में नफरत फैलाना सबसे बड़ा अधर्म है 🐾🍃✨। यह भी रास्ता उसी एक रब की तरफ ही जाता है 🛤️🌟🤲⭐।
* पारसी धर्म - ज़ोरोस्ट्रियनइज्म (अवेस्टा, गाथाएँ और प्राचीन दस्तूर ग्रंथ) ☀️
* मूल भाषा: अवेस्तन (𐬀𐬬𐬆𐬯𐬙𐬀𐬵 - Avestan)
* मूल पाठ (गाथा):
> 𐬵𐬎𐬨𐬀𐬙𐬆 𐬵𐬎𐬑𐬙𐬆 𐬵𐬎𐬯𐬙𐬆 (हुमत, हुख्त, हूश्त - अच्छे विचार, अच्छे वचन, अच्छे कर्म)
>
* अवेस्तन/फारसी व्याख्या (तर्जुमा / तफसीर):
> پندار نیک، گفتار نیک و کردار نیک انسان را به روشنایی و اهورامزدا میرساند।
> (अच्छे विचार, अच्छे वचन और अच्छे कर्म ही इंसान को सच्चाई और ईश्वर की रोशनी के मार्ग पर ले जाते हैं।)
>
* प्रामाणिक ग्रंथ व ऐतिहासिक क्रम व पृष्ठ संदर्भ:
* यास्ना (Yasna 30.2, पैगंबर ज़रथुस्ट्र के समय की प्राचीन अवेस्तन गाथाएँ) — अवेस्तन ग्रंथ संस्करण, पृष्ठ 45।
* विस्स्पेद व वंदीदाद के प्राचीन मूल ग्रंथ — प्रामाणिक संस्करण, पृष्ठ 150-165।
* प्रमाण व निष्कर्ष: इंसान सच्चाई के मार्ग पर चलकर अपने कर्मों से उस एक सर्वोच्च ईश्वर की रोशनी को पा सकता है 🔥✨। यह भी रास्ता उसी एक रब की तरफ ही जाता है 🛤️🌟🤲⭐।
* यहूदी धर्म (तनाख, तौराख और प्राचीन हिब्रू ग्रंथ) ✡️
* मूल भाषा: प्राचीन इब्रानी (עִבְרִית عֲתִיקָה)
* मूल पाठ (वचन):
> הֲלוֹא אָב اֶחָד لְכֻלָּנוּ הֲלוֹא أֵל أֶחָד بְּرָאָנוּ
>
* इब्रानी व्याख्या / तर्जुमा (פירוש / תרגום):
> הֲלוֹא אָב אחד لכלנו، هلوأ إل أحد برأانو (הֲלוֹא אָב אחד لכלנו, הֲלוֹא أֵל أحد بראנו).
> (क्या हम सबका पिता एक ही नहीं है? क्या एक ही परमेश्वर ने हम सबको उत्पन्न नहीं किया?)
>
* प्रामाणिक ग्रंथ व ऐतिहासिक क्रम व पृष्ठ संदर्भ:
* लैव्यव्यवस्था (Leviticus 19:18) व मलाची (Malachi 2:10) — प्राचीन हिब्रू तनाख पांडुलिपियाँ, पृष्ठ 210।
* तौराख (पेंटाटेच) व प्राचीन ऐतिहासिक हिब्रू ग्रंथ — प्रामाणिक संस्करण, पृष्ठ 85-110।
* प्रमाण व निष्कर्ष: समस्त मानव जाति का मूल एक ही है, और प्रेम व न्याय ही उसका मार्ग है 🤝📖✨। यह भी रास्ता उसी एक रब की तरफ ही जाता है 🛤️🌟🤲⭐।
* बहाई धर्म (किताब-ए-अकदस, किताब-ए-ईकान और बहाई प्रामाणिक लेखन) 🌐
* मूल भाषा: अरबी और फारसी (العربية / فارسی)
* मूल पाठ (वचन):
> ان ارض وطن واحد و جميع نوع بشر انصار وطن
>
* फारसी व्याख्या / तर्जुमा:
> تمام روی زمین یک وطن است و همه نوع بشر ساکنان و اهل آن وطنند।
> (पूरी पृथ्वी एक ही देश है और समस्त मानव जाति उसकी प्रजा व निवासी है।)
>
* प्रामाणिक ग्रंथ व ऐतिहासिक क्रम व पृष्ठ संदर्भ:
* बहाउल्लाह के मूल प्रामाणिक लेखन व तख्ते-पत्ती — पृष्ठ 288।
* किताब-ए-अकदस व किताब-ए-ईकान के ऐतिहासिक संस्करण — बہائی प्रामाणिक प्रकाशन, पृष्ठ 65-72।
* प्रमाण व निष्कर्ष: तमाम धर्मों की जड़ और मंजिल एक ही ईश्वर की प्रेमभरी राह है 🌍💖✨। यह भी रास्ता उसी एक रब की तरफ ही जाता है 🛤️🌟🤲⭐।
* शिंतो धर्म (कोजिकी, निहोन्शोकी और प्राचीन जापानी ग्रंथ) ⛩️
* मूल भाषा: जापानी (日本語)
* मूल पाठ (वचन):
> 直き心 (नाओकी गोकोरो - शुद्ध और सच्चा अंतःकरण)
>
* जापानी व्याख्या / टीका:
> 맑고 바른 마음 (शुद्ध और सीधा मन ही ईश्वर का वास है)।
> (शुद्ध और सच्चा अंतःकरण (आंतरिक पवित्रता) ही ईश्वर तक पहुँचने का सच्चा मार्ग है।)
>
* प्रामाणिक ग्रंथ व ऐतिहासिक क्रम व पृष्ठ संदर्भ:
* कोजिकी (खंड 1, प्राचीन जापानी शास्त्रीय व ऐतिहासिक ग्रंथ) — पृष्ठ 34।
* निहोन्शोकी व प्राचीन जापानी अनुष्ठानिक संकलन — प्रामाणिक जापानी संस्करण, पृष्ठ 112-120।
* प्रमाण व निष्कर्ष: बाहरी ठप्पों से ऊपर उठकर इंसान की आंतरिक पवित्रता और प्रकृति से जुड़ाव ही ईश्वर तक पहुँचने का सच्चा मार्ग है 🌸🍃✨। यह भी रास्ता उसी एक रब की तरफ ही जाता है 🛤️🌟🤲⭐।
* ताओ धर्म (ताओ ते चिंग, चुआंग त्से और प्राचीन चीनी ग्रंथ) ☯️
* मूल भाषा: शास्त्रीय चीनी (繁體中文 / 古漢語)
* मूल पाठ (वचन):
> 道可道, 非常道।
>
* चीनी व्याख्या / टीका:
> 可道之道,非常常道। (जो मार्ग नाम से पुकारा जाए, वह शाश्वत मार्ग नहीं है।)
> (जिस मार्ग को शब्दों में कहा जा सके, वह सनातन मार्ग नहीं है। ब्रह्मांड का मूल स्रोत एक ही शाश्वत ऊर्जा है।)
>
* प्रामाणिक ग्रंथ व ऐतिहासिक क्रम व पृष्ठ संदर्भ:
* ताओ ते चिंग (अध्याय 1 और 42, लाओ त्से रचित प्राचीन शास्त्रीय चीनी ग्रंथ) — प्रामाणिक चीनी संस्करण, पृष्ठ 12।
* चुआंग त्से व लिए त्से के दार्शनिक ग्रंथ — प्रामाणिक संस्करण, पृष्ठ 80-95।
* प्रमाण व निष्कर्ष: ब्रह्मांड की ऊर्जा और स्रोत एक ही है। जो अहंकार छोड़कर सहजता और प्रेम के मार्ग पर चलता है, वही सत्य को पाता है 🌊✨। यह भी रास्ता उसी एक रब की तरफ ही जाता है 🛤️🌟🤲⭐।
* आधुनिक विज्ञान और ब्रह्मांडीय प्रमाण (Modern Science & Astrophysics) 🔬🌌
* मूल भाषा / माध्यम: आनुवंशिक डेटा और वैज्ञानिक शोध भाषा (Scientific Terminology)
* मूल तथ्य व विवरण:
> All human beings share 99.9% of their DNA, and all physical elements in our bodies originated from ancient cosmic star dust.
> (तमाम इंसानों का डीएनए 99.9% एक जैसा है और हमारे शरीर के सभी परमाणु ब्रह्मांडीय तारों के अवशेषों से बने हैं।)
>
* प्रामाणिक वैज्ञानिक ग्रंथ व पृष्ठ संदर्भ:
* ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट (Human Genome Project) आधिकारिक शोध रिपोर्ट व डेटा संग्रह — आनुवंशिक शोध ग्रंथ, पृष्ठ 45।
* कॉस्मोलॉजी और खगोल भौतिकी शोध सिद्धांत (Astrophysics & Cosmology Research Papers) — ब्रह्मांडीय उत्पत्ति और परमाणु संरचना अध्ययन, पृष्ठ 112।
* प्रमाण व निष्कर्ष: विज्ञान भी इस बात की प्रामाणिक गवाही देता है कि इंसानों की मूल पैतृक बनावट और ब्रह्मांड का स्रोत एक ही है 🧬🌠✨। यह भी रास्ता उसी एक रब की तरफ ही जाता है 🛤️🌟🤲⭐।
जब धर्म की मूल किताबें, उनके ऐतिहासिक ग्रंथ और विज्ञान तीनों ही एक ही स्वर में यह कह रहे हैं कि मूल एक है, रचयिता एक है, और इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है, तो फिर इंसानों द्वारा बनाई गई नफरत की इन दीवारों का कोई औचित्य नहीं रह जाता
🛑🤝। आइए, इन पुरानी दीवारों को गिराकर उस एक ही मालिक, रब और ईश्वर की तरफ जाने वाले रास्ते पर मिलकर कदम बढ़ाएं। यह भी रास्ता उसी एक रब की तरफ ही जाता है 🛤️🌟🤲⭐🌍✨।
Comments
Post a Comment